आज विधानसभा में बहुमत साबित करेगी बिहार में नई सरकार, अग्निपरीक्षा में पास होंगे 'सम्राट'? जानिए, विधानसभा का गणित
पहली बार भाजपा का कोई नेता मुख्यमंत्री पद संभालकर सदन में बहुमत साबित करेगा
पटना: बिहार की राजनीति में आज का दिन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिहार के नए सीएम बने सम्राट चौधरी के लिए आज अग्निपरीक्षा की खड़ी है। उनकी अगुवाई वाली NDA सरकार आज, 24 अप्रैल को विधानसभा में अपना विश्वास मत पेश करेगी। फ्लोर टेस्ट के लिए विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है। फ्लोर टेस्ट की तैयारी पूरी हो चुकी है, NDA गठबंधन के सभी विधायको का पटना पहुंचना सिलसिला जारी है।
शुक्रवार को सुबह 11 बजे शुरू होने वाले एक दिवसीय विशेष सत्र में सीएम सम्राट चौधरी सदन में विश्वास प्रस्ताव रखेंगे। 15 अप्रैल को शपथ ग्रहण के नौ दिन बाद यह उनकी सरकार की पहली बड़ी अग्निपरीक्षा होगी। यह बिहार के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला है, क्योंकि पहली बार भाजपा का कोई नेता मुख्यमंत्री पद संभालकर सदन में बहुमत साबित करेगा।
वर्तमान में 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में बांकीपुर सीट (नितिन नवीन राज्यसभा सांसद बन गए) खाली होने के कारण प्रभावी संख्या 242 है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को जीत के लिए 122 के जादुई आंकड़े की जरूरत है, जबकि उनके पास 201 विधायकों का प्रचंड समर्थन हासिल है। गठबंधन में भाजपा के पास 88, जदयू के 85, लोजपा (रामविलास) के 19 और हम (HAM) व राष्ट्रीय लोक मोर्चा के 4-4 विधायक हैं. इस तरह एनडीए के पास कुल 201 विधायकों का समर्थन है. हालांकि, पहले यह संख्या 202 थी, लेकिन भाजपा नेता नितिन नवीन के राज्यसभा जाने और विधानसभा से इस्तीफा देने की वजह से एक सीट कम हो गई है. फिर भी बहुमत के लिए जरूरी जादुई आंकड़े से यह संख्या काफी ज्यादा है.
दूसरी तरफ विपक्षी खेमे यानी महागठबंधन की स्थिति थोड़ी कमजोर दिख रही है. उनके पाले में राजद के 25, कांग्रेस के 6, ओवैसी की पार्टी (AIMIM) के 5 और वाम दलों के 3 विधायकों के साथ बीएसपी का एक और एक निर्दलीय विधायक का समर्थन शामिल है. विधानसभा में विपक्षी विधायकों की कुल संख्या एनडीए के मुकाबले बहुत कम है, जिसे देखते हुए राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि सरकार आसानी से अपना विश्वास मत हासिल कर लेगी.
उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव की मौजूदगी में एनडीए ने अपने सभी विधायकों को पटना में ही रहने का निर्देश दिया है। भाजपा और सहयोगी दलों का मानना है कि ये सत्र केवल एक औपचारिकता है, क्योंकि विपक्ष के पास संख्या बल का भारी अभाव है।
अग्निपरीक्षा सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव की भी है। 12 फरवरी 2024 के पिछले फ्लोर टेस्ट में तेजस्वी ने 'खेला होने' का दावा किया था, लेकिन उनके अपने ही विधायक एनडीए के पाले में चले गए थे। फिर राज्यसभा चुनाव में भी तीन विधायकों ने धोखा दे दिया। इस बार 35 विधायकों वाले सिमटे हुए महागठबंधन के सामने अपने साथियों को पाला बदलने से रोकना सबसे बड़ी चुनौती है। तेजस्वी लगातार सम्राट सरकार पर हमलावर हैं, लेकिन सदन के भीतर उनके रणनीतिक कौशल की असल परीक्षा आज होनी है।
बिहार की राजनीति में ये बदलाव नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे और 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद आया है। दो दशकों तक बिहार की सत्ता के केंद्र रहे नीतीश के हटने के बाद सम्राट चौधरी ने 24वें मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार की ओर से बुलाए गए इस एक दिवसीय विशेष सत्र में मुख्यमंत्री सदन को संबोधित भी करेंगे, जो भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेगा।
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